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7 Mar 2026, Sat

अब टी एस सिंहदेव ने भी निगम के जल विभाग के अधिकारियों की योग्यता पर उठाये सवाल…

सोनू केदार की रिपोर्ट: सरगुजा – अंबिकापुर में वाटर सप्लाई व्यवस्था पर सटीक खबर द्वारा उठाये गये सवालों पर छत्तीसगढ़ के पूर्वा उप मुख्यमंत्री ने भी मुहर लगा दी है. नगर निगम में जल विभाग में एक्सपर्ट की नियुक्ति ना होने को उन्होंने भी गलत बताया है. उन्होंने कहा है की जल प्रदाय की व्यवस्था के लिए पीचई के विशेषग्य होने चाहिए सिविल इंजीनियर के भरोसे कैसे काम किया जा सकता है.


दरअसल, अंबिकापुर नगर निगम में जल विभाग की पूरी जिम्मेदारी सतीश रवी और प्रशांत खुल्लर के कन्धों पर है. सतीश रवी सिविल इंजीनियर हैं और प्रशांत खुल्लर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है. एक को निर्माण कराने का अनुभव है तो दुसरे को विजली विभाग की दक्षता है बावजूद इसके इन दोनों को जल विभाग जैसे बेहद संवेदनशील विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई है. अब इस मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ने भी आपत्ति जताई है.

टी एस सिंहदेव ने कहा की “जल प्रदाय की व्यवस्था पीएच से जुड़ी हुई जो व्यवस्थाएं रहती है उनसे रहता है। कई बार जो इंजीनियर रहते हैं वो इस विभाग में दक्ष जो रहते हैं जिनका अनुभव रहता है उनको रखते हैं। कंस्ट्रक्शन का काम जो है वो मैकेनिकल इंजीनियर कर सकता है। लेकिन ये जो पानी और ये सब के शोध का काम और इसकी जांच का काम है ये अलग प्रकार से होता है। इसमें स्वास्थ्य विभाग भी जुड़ा रहता है क्योंकि मितानिनों को निरंतर उसका सैंपल लेते रहना चाहिए। हर हफ्ते सैंपल लेते रहना चाहिए। चिन्हांकित जगहों से वो नहीं होता कि चल रहा है सब ठीक चल रहा है सब शिथिल हो जाते हैं अचानक कुछ होता है तो पता चला कभी तो इसमें भी वैसे ही हुआ और कई बार पीएच विभाग से डेपुटेशन में भी लोगों को लिया जाता है और डेपुटेशन में लेके लोगों को निगम में भी रख के और जल शोधन का जो काम है उसको शुद्ध करने का जो काम है उस प्रक्रिया को बारीकी से देखा जाता है। वाटर वर्क से ले इंटेक वेल जहां रहता है इंटेक वेल से ले उनका जो फिल्टर रहते हैं फिल्टर से पानी जा रहा है उसके पहले फिटकरी इत्यादि डालते हैं क्लोरीन इत्यादि डालते हैं अलग-अलग स्तर पे सारा काम करते हैं, फिर पानी का सैंपल लेते हैं वहां से उसकी टेस्टिंग भी होती है और उसके बाद में पानी सप्लाई में छोड़ा जाता है। तो एक तो टेस्टिंग सप्लाई पॉइंट पे हो गई इंटेक वेल पे जहां से आपने पानी उठाया। दूसरा अब पाइप में तो कहीं कोई गड़बड़ी नहीं होगी। कि जब हम पानी को सप्लाई कर रहे हैं उसमें कहीं पाइप टूट गई तो कोई दूसरा दूषित पानी या दूषित तत्व पानी में तो उस पाइप लाइन में तो नहीं मिल जा रहे हैं उस पानी में जो कि बीमारी को आगे ले जा रहे हैं उसको चेक करना चेक कौन करेगा वही व्यक्ति जो सैंपल लेगा अगर आप लगातार सैंपल नहीं ले रहे हैं तो पता नहीं चलेगा और पता करना इतना आसान रहता है हम लोग चार लोग बैठे हैं दो लोगों के घर तक दूषित पानी आ रहा है तो कहां कहां पकड़ाएगा आप पूरी पाइप लाइन को तो अभी आपने वो टेक्नोलॉजी अपनाई नहीं है। नहीं तो कहां लीक है तुरंत पता चल सकता है। महंगी तकनीक है। हमने उसको नहीं अपना रखा। कोई दिक्कत नहीं। पर कहां तक दूषित पानी आ रहा है। आप पीछे चलिए। तो जहां तक साफ पानी आ रहा है वो पता चल जाएगा कि यहां से आगे दूषित पानी आ रहा है। प्रैक्टिकल चीजें हैं। तुरंत पता चल जाता है कि यहां तो साफ आ रहा है। आपके घर तक साफ आ रहा है। इनके घर तक साफ आ रहा है। इनके यहां गड़बड़ हो गया। मेरे यहां गड़बड़ पानी आ रहा है। तो इनके दोनों के बीच का जो जगह है उसको चेक करो। वहां से कहीं लीकेज होगा और उसको फिर ठीक करिए। यह आपने नहीं किया। इस कारण से यह परिस्थितियां बनी कि दूषित पानी सप्लाई होता रह गया कुछ इलाकों में और यह परिणाम है।


दरअसल, सटीक खबर ने 28 फरवरी को अपनी खबर में बताया था की अंबिकापुर नगर निगम के जल विभाग में कोई भी तकनीकी एक्सपर्ट नही नहीं, ना ही मैकेनिकल इंजीनियर है और ना ही ना केमिकल इंजीनियर है, नगर निगम में एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और एक सिविल इंजीनियर के भरोसे नगर निगम पूरे शहर को जीवन देने वाला जल पिला रहा है. अब ज़रा आप सोंचिये की पानी साफ़ है या नही पानी को साफ़ करने में डालने वाले केमिकल किस स्तर के हैं, मशीनों कम मेंटनेंस कैसे होना है इस सबकी जिम्मेदारी एक प्राइवेट कंपनी को है. लेकिन प्राइवेट का कंपनी सही काम कर रही है या नही इसकी जाँच करने कोई भी दक्ष इंजीनियर निगम में नही है.


सिविल इंजीनियर जिसको कंस्ट्रक्शन का अनुभव है वो कैसे केमिकल और मैकेनिकल की जाँच करेगा, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कैसे मैकेनिकल और केमिकल की जाँच करेगा. इतना ही नही पूर्व में पीएचई से एक इंजीनियर नगर निगम में अटैच थे वर्तमान में ये व्यवस्था भी नही है. और जब पूरे शहर में लोग पानी से होने वाली तमाम बीमारियों से ग्रस्त हैं और हंगामा मचा हुआ है तो जिम्मेदारों को ऐसे लोगों से प्रभार हटा कर टेक्नीकल लोगों को जिम्मेदारी देनी चाहिए. बड़ी बात ये है की नगर निगम के पास ऐसे टेक्नीकल इंजीनियर हैं लेकिन उनको अन्य विभाग में रखकर उनकी योग्यता का लाभ लेने के बजाय निगम उनसे आफिस वर्क कराता