सरगुजा से रायपुर तक इन दिनों मंत्री रामविचार नेताम के जन्मदिन को लेकर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग और संस्थाओं के नाम से प्रकाशित विज्ञापन चर्चा का विषय बने हुए हैं शहर-शहर चौक-चौराहों पर बधाई संदेशों की भरमार है, और कई संस्थाओं द्वारा पूरे पेज के विज्ञापन दिए जाने की बात सामने आ रही है स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आम जनता महंगाई और बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है, तब इस तरह के भव्य प्रचार पर लाखों रुपये खर्च होना कई सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल ये है की विज्ञापन और होर्डिंग किन स्रोतों से प्रायोजित हो रहे हैं? क्या यह पूरी तरह निजी पहल है, या इसके पीछे कोई और व्यवस्था काम कर रही है?
राजनीति की शुरुआत सादगी से करने वाले नेता की आज की छवि भव्य प्रचार के साथ दिखाई दे रही है ऐसे में जनता के बीच चर्चा तेज है कि क्या जनप्रतिनिधि का काम सेवा से पहचाना जाना चाहिए या होर्डिंग और विज्ञापनों की संख्या से? विवादों से भी मंत्री का नाम समय-समय पर जुड़ता रहा है चाहे बयानबाजी हो या जनसुनवाई के दौरान व्यवहार को लेकर उठे आरोप अब जन्मदिन पर संस्थाओं के नाम से हुए प्रचार ने एक नई बहस छेड़ दी है।
रामानुजगंज और सरगुजा की जनता अब यह तय करेगी कि यह जनसेवा की राजनीति है या प्रचार की राजनीति लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का अधिकार है और जवाब देना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी।



