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28 Feb 2026, Sat

जीवन देने वाले जल के साथ समझौता : एक्सपर्ट नही बल्कि सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के भरोसे जल विभाग

सोनू केदार की रिपोर्ट – सरगुजा – जल ही जीवन है वाला स्लोगन तमाम सरकारी कार्यालयो को वाटर सप्लाई संयत्रों में लिखा मिल जाता है. लेकिन जीवन देने वाला जल आपकी जान भी ले सकता है. क्योंकी गलती से भी दूषित पानी किसी ने पी लिया तो वो बीमार हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है. ये एक बेहद संवेदनशील विषय है, लेकिन निगम में बैठे जिम्मेदार समस्या के समाधान पर ध्यान ना देकर खुद को सही और विपक्ष को ग़लत साबित करने में लगे हुए हैं. जबकी निगम में बड़ी तकनीकी कमियों पर किसी का ध्यान नही है.

अंबिकापुर नगर निगम के जल विभाग में कोई भी तकनीकी एक्सपर्ट नही नहीं, ना ही मैकेनिकल इंजीनियर है और ना ही ना केमिकल इंजीनियर है, नगर निगम में एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और एक सिविल इंजीनियर के भरोसे नगर निगम पूरे शहर को जीवन देने वाला जल पिला रहा है. अब ज़रा आप सोंचिये की पानी साफ़ है या नही पानी को साफ़ करने में डालने वाले केमिकल किस स्तर के हैं, मशीनों कम मेंटनेंस कैसे होना है इस सबकी जिम्मेदारी एक प्राइवेट कंपनी को है. लेकिन प्राइवेट का कंपनी सही काम कर रही है या नही इसकी जाँच करने कोई भी दक्ष इंजीनियर निगम में नही है.

सिविल इंजीनियर जिसको कंस्ट्रक्शन का अनुभव है वो कैसे केमिकल और मैकेनिकल की जाँच करेगा, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कैसे मैकेनिकल और केमिकल की जाँच करेगा. इतना ही नही पूर्व में पीएचई से एक इंजीनियर नगर निगम में अटैच थे वर्तमान में ये व्यवस्था भी नही है. और जब पूरे शहर में लोग पानी से होने वाली तमाम बीमारियों से ग्रस्त हैं और हंगामा मचा हुआ है तो जिम्मेदारों को ऐसे लोगों से प्रभार हटा कर टेक्नीकल लोगों को जिम्मेदारी देनी चाहिए. बड़ी बात ये है की नगर निगम के पास ऐसे टेक्नीकल इंजीनियर हैं लेकिन उनको अन्य विभाग में रखकर उनकी योग्यता का लाभ लेने के बजाय निगम उनसे आफिस वर्क कराता है.