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28 Feb 2026, Sat

लक्ष्मी नारायण अस्पताल की बिल्डिंग अवैध, नर्सिंग होम एक्ट का उल्लंघन बावजूद इसके कोई कार्रवाई नही

सोनू केदार की रिपोर्ट – सरगुजा : ज़रा सोंचिये जिस जगह पर लोगों की जान बचाने का काम होता हो, जहाँ लोग एक उम्मीद लेकर जाते हैं की उनकी बीमारी वहां ठीक की जायेगी. उस स्थान पर ही सब कुछ अवैध होने के आरोप हैं. ये हम नही कह रहे हैं, ये आरोप स्थानीय लोगो का है इतना ही नहीं नगर निगम ने भी यह माना है की अस्पताल का निर्माण अवैध है. यहाँ अस्पताल बनाने के लिए कोई भी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नही किया गया था. अस्पताल प्रबंधन इतना रसूखदार है की एक अवैध निर्माण पर उसने बिजली विभाग से नया ट्रांसफार्मर भी लगवा लिया है.


अंबिकापुर के लक्ष्मी नारायण अस्पताल की रसूखदारी इतनी है की ना सिर्फ नगर निगम की अनापत्ति के बिना इतनी बड़ी बिल्डिंग खडी कर ली बल्कि बिजली विभाग को घूंस देकर ट्रांसफार्मर भी लगवा लिया. स्वास्थ्य विभाग में इनके रिश्तेदार हैं जिनके रहमोकरम पर नर्सिंग होम एक्ट का खुला उल्लंघन भी ये खुलकर कर रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग अस्पताल को बंद कराने के बजाय उसे बचाने में लगा हुआ है. नर्सिंग होम के प्रभारी डॉ पीके सिन्हा खुद स्वीकार कर रहे हैं दो बार के निरीक्षण में अस्पताल में व्यापक कमी पाई गई है. बावजूद इसक उन्होंने जन हित को ध्यान में रखते हुए अस्पताल पर अब तक कोई कार्रवाई नही की है.

शहर के सबसे अधिक घनी आबादी वाले क्षेत्र में अस्पताल संचालित है, इस अस्पताल के पास खुद का पार्किंग नही है. यहीं पर सब्जी व फल का बाजार लगता है. काफी भीड़ भाड़ वाला इलाका है जिस कारन अस्पताल के सामने गाडिया खडी होने से अक्सर यहाँ जाम की स्थिति बनी रहती है. सडक से गुजरने वाला हर आम और खास आदमी इस जाम से प्रभावित होता है . लेकिन मजाल है की कोई कुछ बोल सके या कार्रवाई कर सके. मोहल्ले के कुछ लोगो ने अस्पताल के खिलाफ आवाज बुलंद की तो नगर निगम ने अस्पताल के अवैध निर्माण को तोड़ने का फैसला लिया. हाई कोर्ट ने भी नगर निगम को इस अस्पताल के अवैध निर्माण को तोड़ने आदेशित किया. लोगो ने गलत तरीके से लगाये गये ट्रांसफार्मर को हटाने का भी विरोध किया.

बड़ी बात ये है की जब ट्रांसफार्मर हटाने टीम आई तो अस्पताल प्रबंधन उनसे हुज्जत करने लगा. वार्ड वासियों ने जब विरोध किया तो अस्पताल के लोगो ने मोहल्ले के एक सभ्रांत व्यक्ति के साथ मारपीट कर दी. जिसके बाद मोहल्ले के लोग भड़क गये और माहौल गर्म हो गया. दोनों तरफ से मारपीट शुरू हो गई और दोनों पक्षों ने कोतवाली थाने में शिकायत दी है.


अब मसला ये है की जब किसी गरीब का ठेला हटाना होता है तो उसे अवैध बताते हुए नगर निगम बड़ी कार्रवाई करता है, दल बल और मशीनरी के दम पर एक ही दिन में शहर के सारे ठेले गुमटी उखाड़कर फेंक दिए जाते है. लेकिन रसूखदारों द्वारा किया गया अवैध निर्माण गिराने में प्रशासन के भी हाँथ कांपते हैं. अब देखना यह होगा की नगर निगम, हाई कोर्ट सभी ने निर्माण को अवैध बताया है. नर्सिंग होम एक्ट में तमाम कमियाँ पाई गई है तो ऐसे में ये बिल्डिंग कब तक गिरेगी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कब कैंलिस होगा, या फिर सब कुछ पैसों की धमक में दबकर शांत हो जाएगा.