निष्पक्ष पत्रकारिता बनी जानलेवा
आज के समय में सच उजागर करना और घोटालेबाजों की पोल खोलना मौत को गले लगाने जैसा हो गया है। कुछ भ्रष्ट अधिकारी और उनके पाले हुए गुंडे कानून को ताक पर रखकर पत्रकारों की जान लेने तक की साजिश रच रहे हैं।
संपादक की हत्या की साजिश
हिंद स्वराष्ट्र और सिंधु स्वाभिमान समाचार पत्र के संचालक दंपत्ति द्वारा तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा की मिलीभगत से की गई फर्जी रजिस्ट्री और प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए घोटाले का खुलासा किया गया था। इन खबरों से बौखलाए दलाल और भ्रष्ट अधिकारी आपस में मिलकर संपादक प्रशांत पांडे की हत्या की सुपारी देने तक पहुंच गए।
तीन असफल प्रयास
पहले ट्रक से कुचलने की योजना बनाई गई।
दूसरी बार शूटर बुलाकर हमला कराना तय हुआ, लेकिन संपादक उज्जैन चले गए।
तीसरी बार बाइक से लौटते वक्त परिवार समेत उन्हें गाड़ी से कुचलने की कोशिश की गई, मगर भीड़ के कारण योजना नाकाम रही।
ग्रामसभा में खुला राज
हरिपुर ग्रामसभा के दौरान आरोपी संजय गुप्ता ने पंचायत के सामने खुद स्वीकार किया कि हत्या की सुपारी दी गई थी और धमकी भी दी थी। उसने माफी मांगी, पर उसका साथी हरिओम गुप्ता अब भी अड़ा हुआ है।
आईजी से शिकायत
लगातार मिल रही धमकियों और असफल हत्या प्रयासों से डरे संपादक ने आईजी सरगुजा रेंज को सबूतों सहित शिकायत सौंपकर सुरक्षा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।



