रघुनाथनगर, बलरामपुर:
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत एक युवक शासकीय वर्दी पहनकर खुलेआम फर्जी वनरक्षक बना घूम रहा है और सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें डालकर कानून और प्रशासन को खुली चुनौती दे रहा है।
यह युवक सुनहट गांव निवासी प्रमोद कुशवाहा है, जो बिना किसी अधिकार के वनरक्षक की वर्दी पहनकर फेसबुक स्टोरी में अपनी तस्वीरें डाल रहा है। इन तस्वीरों में वह किसी शासकीय कर्मचारी की तरह प्रस्तुत होकर लोगों में भय का माहौल बना रहा है।
◾ वर्दी का दुरुपयोग – कौन दे रहा है बढ़ावा?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रमोद कुशवाहा वन विभाग के कुछ कर्मचारियों का करीबी है, जो उसे फर्जी वर्दी पहनने की न केवल अनुमति देते हैं, बल्कि विभागीय कार्यों में भी उसे अनौपचारिक सहयोगी की तरह इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या किसी वर्तमान वनरक्षक ने ही प्रमोद को अपनी वर्दी दी है?
अगर हाँ, तो यह केवल विभागीय अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि राजकीय प्रतिष्ठान के प्रतीक चिन्ह का दुरुपयोग है।
🔎 वन विभाग की लापरवाही या मिलीभगत?
रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र में पहले भी लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद विभागीय सुधार नहीं दिखा। अब फर्जी वर्दी प्रकरण ने यह जाहिर कर दिया है कि:
विभागीय अनुशासन ठप है,
भ्रष्ट तत्व बेलगाम हैं,
और जवाबदेही शून्य है।
जनता की मांग – हो कड़ी कार्रवाई!
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों की यह स्पष्ट मांग है कि:
- प्रमोद कुशवाहा के विरुद्ध तत्काल IPC की धारा 170 (सरकारी पद का झूठा प्रदर्शन), 171, 419, 420, और आईटी एक्ट की धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया जाए।
- जिस वनरक्षक ने वर्दी उपलब्ध कराई, उसके खिलाफ विभागीय निलंबन व जांच की प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ हो।
- इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हो।
जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से अपील
माननीय जिला कलेक्टर बलरामपुर, मुख्य वन संरक्षक, और वन विभाग मंत्रालय से आग्रह है कि इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लें, ताकि शासकीय प्रतिष्ठा और वन विभाग की साख दोनों की रक्षा हो सके।
यदि इस तरह के फर्जी वनरक्षक खुलेआम घूमते रहे, तो न केवल शासन का डर समाप्त होगा बल्कि आम जनता का विश्वास भी टूटेगा।

इस मामले में बलरामपुर वनमंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी ने बताया कि “युवक द्वारा शासकीय वर्दी पहनने का मामला गंभीर है, इसकी जांच कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकतानुसार मामला थाने को भी सौंपा जाएगा।”

