बलरामपुर। सटीक खबर।
वाड्रफनगर सिविल अस्पताल में पदस्थ खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमन्त दीक्षित पर लगाए गए आरोप अब संदेह के घेरे में आ गए हैं। अस्पताल स्टाफ और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि डॉ. दीक्षित पर लगे सभी आरोप निराधार और भ्रामक हैं।
भारी कमी के बावजूद व्यवस्था संभाल रहे हैं
वाड्रफनगर विकासखंड में डॉक्टर और स्टाफ की भारी कमी है। इसके बावजूद डॉ. दीक्षित खींचतान कर अस्पताल की व्यवस्था को संभाले हुए हैं। कई बार मरीजों की संख्या अधिक होने से कर्मचारियों को 1–2 घंटे अतिरिक्त सेवा देनी पड़ती है। लेकिन इसे उत्पीड़न बताकर आरोप लगाना गलत है। समर्थकों का कहना है कि किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का दायित्व है कि वह मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराए, और डॉ. दीक्षित यही कर रहे हैं।
“यार” शब्द पर बेवजह बवाल
विवाद में यह भी कहा जा रहा है कि डॉ. दीक्षित ने बातचीत में “यार” शब्द का इस्तेमाल किया। जबकि सच यह है कि “यार” शब्द कभी भी किसी व्यक्ति के मुंह से सहजता में निकल सकता है। यहां तक कि मुख्यमंत्री और बड़े नेताओं के मुंह से भी खुले मंच पर यह शब्द निकल चुका है। ऐसे छोटे-छोटे मुद्दों को बढ़ाकर बवाल खड़ा करना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि संगठन की गंभीरता पर भी सवाल उठाता है।
संगठन को करना चाहिए था आंतरिक जांच
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर आरोप लगने पर संगठन का पहला कर्तव्य होना चाहिए कि वह खुद आंतरिक जांच करे। लेकिन बिना तथ्य और बिना ठोस सबूत के आंदोलन की चेतावनी देना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि अस्पताल के कार्य में भी बाधा उत्पन्न करता है।
ईमानदारी और सख्ती से कुछ लोग नाखुश
डॉ. दीक्षित हमेशा अस्पताल की अनुशासन और कार्यसंस्कृति पर ध्यान देते हैं। यही कारण है कि कुछ लोग उनकी ईमानदारी और सख्त कार्यशैली से असहज हैं और उन्हें फँसाने की कोशिश कर रहे हैं।
मरीजों के लिए समर्पित
स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. दीक्षित दिन-रात अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए काम करते हैं। सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के बावजूद उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया।
भले आदमी को न फँसाएँ
स्थानीय नागरिकों और स्टाफ ने अपील की है कि प्रशासन किसी भी भले और ईमानदार डॉक्टर को बेवजह फँसाने के बजाय उन लोगों पर कार्रवाई करे जो निजी स्वार्थ साधने के लिए अफवाह फैला रहे हैं।



