बलरामपुर।
रघुनाथनगर थाना क्षेत्र में पुलिस की लापरवाही अब लापरवाही नहीं रही, बल्कि खुली मिलीभगत की तस्वीर पेश कर रही है। एक गरीब मजदूर का 12,100 रुपये हड़प लेने वाले फड़मुंशी पर महीनों बाद भी FIR दर्ज न होना पुलिस प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
मामला क्या है?
ग्राम रघुनाथनगर निवासी लवकुमार साहू, जो मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता है, ने मई 2025 में कहुआपानी फड़ में 2200 गड्डी तेंदूपत्ता जमा किया। इसकी कीमत ₹12,100 बनती है। लेकिन फड़मुंशी अम्मेलाल सिंह ने रकम मजदूर के खाते में जमा करने की बजाय अपने निजी खाते में निकाल ली।
जब मजदूर ने इस धोखाधड़ी पर सवाल किया तो आरोपी ने न सिर्फ उसे अपमानित किया बल्कि धमकी दी –
“तुम कब तेंदूपत्ता बेचे हो? तुम्हारे खाते में कोई पैसा नहीं आएगा, रजिस्टर में एंट्री ही नहीं है।”
जबकि हकीकत यह है कि उसी फड़मुंशी ने मजदूर से कहा था –
“तुम घर जाओ, मैं एंट्री कर दूंगा।”
यानी साफ है कि गरीब की मेहनत की कमाई को फड़मुंशी ने सीधे डकार लिया।
गवाह भी मौजूद
इस पूरे गड़बड़ी के प्रत्यक्ष गवाह रामकुमार साहू, महेश जायसवाल और मनोज गुप्ता हैं, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम को अपनी आंखों और कानों से देखा-सुना।
पुलिस की चुप्पी और खेल
पीड़ित ने 07 अगस्त 2025 को रघुनाथनगर थाने में लिखित शिकायत देकर BNS की धारा 316, 318, 320, 337 और 73 के तहत FIR दर्ज करने की मांग की। लेकिन आज 40 दिन से अधिक बीत गए, न तो FIR दर्ज हुई और न ही कोई कार्रवाई।
यह सवाल उठना लाजिमी है कि –
क्या आरोपी फड़मुंशी को रघुनाथनगर पुलिस का संरक्षण प्राप्त है?
गरीब मजदूर की गाढ़ी कमाई का गबन करने वाले को बचाना किसकी साजिश है?
गवाह और लिखित आवेदन मौजूद होने के बावजूद FIR क्यों नहीं दर्ज हो रही?
जनता का गुस्सा उबाल पर
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की चुप्पी से साफ है कि थाने में भ्रष्टाचार और पक्षपात का खुला खेल चल रहा है। लोग कहते हैं –
“गरीब की कहीं सुनवाई नहीं, पैसे वालों की ही चलती है। पुलिस उन्हीं के साथ है।”
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे थाने का घेराव कर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
पुलिस का रटा-रटाया जवाब
थाना प्रभारी देवेंद्र ठाकुर ने मामले पर सिर्फ इतना कहा –
“बहुत जल्द जांच कर कार्रवाई की जाएगी।”
लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक गरीब मजदूर न्याय की आस में थाने के चक्कर काटता रहेगा?



