सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम बगडोली में ठेकेदार की लापरवाही ने एक मासूम छात्र की जान ले ली। हाई स्कूल रजपुरी में पढ़ने वाला 10वीं का छात्र नकुल सिंह करंट की चपेट में आकर काल के गाल में समा गया। आरोप है
कि ठेकेदार के गुर्गों ने घटना के बाद मृतक की मां को उसके ही घर में बंधक बना लिया है, ताकि वह किसी से मिल या बोल न सके।
हादसा कैसे हुआ
ग्राम पंचायत बगडोली कार्यालय के पास सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। ठेकेदार ने स्कूल जाते समय नकुल को बुलाया और मोटर पंप जोड़ने का काम करने को कहा। नाबालिग नकुल ने जैसे ही पंप जोड़ा, अचानक करंट की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
टूटा गया परिवार
नकुल के पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी। घर में मां, नकुल और उसकी बहन ही रहते थे। अब बेटे की मौत के बाद मां और बहन पूरी तरह असहाय हो गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने अपने दबंग गुर्गों के जरिए मां को घर में कैद कर रखा है। जो भी मिलने जाता है, उसे यह कहकर रोक दिया जाता है कि “ठेकेदार ने सब सेटल कर दिया है।”


ठेकेदार को बचाने में रसूखदारों की भूमिका
गांव में चर्चा है की ठेकेदार से मिलकर गांव के ही कुछ लोग मृतक की माँ पर दबाव बना रहे है ताकि वह आगे थाना पुलिस न्यायालय ना पहुंचे! आरोप है कि ठेकेदार जिशान ख़ान अपनी राजनीतिक पहुंच और दबदबे का इस्तेमाल कर पुलिस पर दबाव बनाया, जिससे अब तक सिर्फ मर्ग पंचनामा ही किया गया है। नाबालिग से जबरन काम कराना और लापरवाही से उसकी मौत होना गंभीर अपराध है, लेकिन पुलिस ने किसी पर अपराध दर्ज नहीं किया है।
पुलिस और श्रम विभाग की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर पुलिस कार्रवाई से क्यों बच रही है? नाबालिग से मजदूरी कराना बाल श्रम कानून का खुला उल्लंघन है। ऐसे मामलों में न केवल ठेकेदार बल्कि निर्माण कार्य से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों पर भी अपराध दर्ज होना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि श्रम विभाग को भी तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, क्योंकि यह केवल एक हादसा नहीं बल्कि कानून की धज्जियां उड़ाने का मामला है।
न्याय की मांग
गांव के लोगों का कहना है कि जब तक पुलिस और प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं करते, तब तक ऐसी घटनाएं थमती नहीं हैं। एक मां ने अपने इकलौते सहारे को खो दिया है और अब न्याय की आस में बंधक बनी बैठी है। सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन उसकी आवाज सुनेगा, या फिर एक बार फिर रसूखदार ठेकेदार और उनके संरक्षणदाता बच निकलेंगे?

